सोमवार, अगस्त 01, 2011

Kabhi aave na Judai


दर्शको को पसंद आ रही है ‘‘कभी आवे ना जुदाई’’

माईलस्टोन इंटरटेनमेन्ट के बैनर तले बनी भोजपुरी फिल्म ‘‘कभी आवे ना जुदाई’’ २९ जुलाई को बिहार में रिलीज़ हुई है जिसे दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं. फिल्म रिलीज़ करने के उपलक्ष में निर्देशक विवेक राव ने अपनी फिल्म से मिडिया और आम लोगो को रूबरू कराने के लिए पटना में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. पटना संग्रहालय के ऑडिटोरियम में आयोजित इस समारोह में कला संस्कृति व युवा खेल मंत्री श्रीमति सुखदा पाण्डेय, पटना सिने सोसाईटी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आर एन दास, फिल्म के नायक पंकज केसरी, निर्मात्री प्रिया भट्टाचार्या, निर्देशक विवेक कुमार राव, वितरक संजय सिन्हा सहित कई गणमान्य लोग व मिडिया कर्मी उपस्थित थे।
इस अवसर पर श्रीमति सुखदा पाण्डेय ने पारिवारिक और मनोरंजक फिल्म बनाने के लिए निर्माता-निर्देशक की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज भोजपुरी फिल्मों पूरे विश्व में अपनी सफलता के परचम लहरा रही है। ऐसे में ऐ फिल्म भी कुछ चमत्कार करेगी ऐसी मुझे उम्मीद है।
पटना सिने सोसायटी के अध्यक्ष आर एन दास ने फिल्म की भूमि प्रस्तुत की और फिल्म की तकनीकी पक्ष को सराहना की एवं कलात्मक पक्ष को भी खुबसूरत बताया। ग्रामीण और शहरी दोनों ही परिदृश्यों के फिल्मांकन की खूब तारीफ की और यहाँ तक कह डाला आज भोजपुरी सिनेमा के पचास वर्ष के इतिहास में सबसे बेहतरीन फिल्म है। अभिनेता पंकज केसरी ने इस फिल्म को अपने कैरियर की सबसे बेहतरीन फिल्म माना। दर्जनों भोजपुरी फिल्मों में अभिनय कर चुके अभिनेता पंकज केसरी ने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को इस फिल्म को एक बेहतरीन तोहफा बताते हुए दर्शकों से इस साफ-सुथरी मनोरंजक इस फिल्म को सपरिवार देखने का अनुरोध किया। निर्माती प्रिया भट्टाचार्या ने फिल्म निर्माण की बारीकियो पर प्रकाश डालते हुए दर्शकों से फिल्म देखने का आग्रह किया। मीडिया से अपनी कैरियर की शुरूआत करने वाली प्रिया भट्टाचार्या ने कहा कि वे आगे भी ऐसी ही फिल्में बनाना पसंद करेंगी।
एफ0टी0आई0आई0 से पास आउट फिल्म निर्देशक विवेक कुमार राव ने भोजपुरी को अपनी मातृभाषा बताते हुए इसका आदर करने का आग्रह किया। अमेरिकी तकनीकी से निर्मित इस फिल्म की तकनीकी पक्षों पर प्रकाश डालते हुए अश्लीलता फहड़ता का मनोरंजक कहना और दर्शकों की इसे दिनांक बताने जैसे कतिपय तत्वों को सावधान हो जाने को कहा। भोजपुरी फिल्म व्यवसाय में लगातार आती गिरावट के प्रति इन्हीं तथ्यों का जिम्मेवार ठहराते हुए साफ-सुथरी मनोरंजक फिल्म बनाने की अपील की। फिल्म निर्माण बेशक दर्शकों का मनोरंजक करने के लिए होता है, मगर, कुछ नैतिक स्तर तो होना हो चाहिए गीत संगीत में मौलिक रचना को तरजीह देना चाहिए जैसा कि उनकी फिल्म को गीत-संगीत में मौलिकता का वातावरण दिखता है।
मूलतः पश्चिमी चंपारण में जन्मे और यहीं की माटी में पले बढ़े विवके कुमार राव को शिक्षा दीक्षा भी बिहार में हुई है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें