रविवार, फ़रवरी 21, 2010

एक्शन से भरी एक मनोरंजक फिल्म‘कानून हमरा मुट्ठी में


’यू.डी. मूवी एवं श्रीराम लखन प्रोडक्शन के बैनर तले बनी निर्मात्री दीपा नारायण झा और निर्देशक आनन्द डी. गहतराज की भोजपुरी फिल्म ‘कानून हमरा मुट्ठी में ’ एक्शन-ड्रामा से भरी एक पावरफुल फिल्म है। इसमें समाज में व्याप्त व्याप्त आपराधिक निरंकुशता के ऊपर लगाम लगाने की बात दिखायी गयी है। रवि किशन एक पुलिस इन्स्पेक्टर हैं, ईमानदार हैं। जटाशंकर (आलोक यादव) के गुर्गों को पकड़ते हैं, तो वह उसकी मां-बहन की हत्या करवा देता है। रवि किशन अपना आपा खो देते हैं और उनके गुण्डों को बेरहमी से पीटते हैं। इससे उसे तीन माह की जेल हो जाती है। फिर वहां शुभम तिवारी नए इन्स्पेक्टर के रूप में आते हैं वह भी जटाशंकर को नकेल पहनाने की कोशिश करते हैं। मगर इनको भी जेल हो जाती है। पर शुभम भाग खड़े होते हैं। फिर जेल से वापस आकर रवि उसी क्षेत्र में कार्य संभालते हैं। फिर कैसे होता है, जटा शंकर का खा़त्मा, यही है ‘कानून हमरा मुट्ठी मंे’।रवि किशन और शुभम तिवारी दोनों ने बहुत अच्छा काम किया है। शुभम तिवारी में भोजपुरी के स्टार बनने के सारे गुण मौजूद हैं। शुभम के साथ मोनालिसा और रवि किशन के साथ दिव्या देसाई की रोमांटिक जोड़ी है और दोनों ही खूबसूरत लगी हैं। रानी चटर्जी पर फिल्माया गया ‘मोबाईल चोली में रखबू तऽ...’ आईटम गीत पहले ही हिट हो चुका है और एक डांसर के रूप में रानी भी अच्छी लगी है। विलेन के रूप में आलोक यादव ने ठीक काम किया है। आनंद गहतराज का निर्देशन बहुत अच्छा है। एस.के. चैहान के संवाद अच्छे हैं विनय बिहारी के गीत और राज सेन-धीरज सेन का संगीत कर्णप्रिय हैं। नरेन्द्र पटेल की फोटोग्राफी बहुत अच्छी है, जीतू का एक्शन रोमांचक है। आदित्य नारायण और सोनू त्रिपाठी सह-निर्माता हैं। उदित नाराायण इस फिल्म के प्रस्तुतकर्ता हैं। कुल मिलाकर ‘कानून हमरा मुट्ठी में’ एक मनोरंजक फिल्म है। यह फिल्म बिहार में पहले ही सुपर हिट हो चुकी है।

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