गुरुवार, सितंबर 29, 2011

गुमनामी में खो गया एक संगीतकार


एक कहाबत है जिसे संगीत का नशा लगा हो उसके आगे सारा नशा बेकार हो जाता है , फिर उसे दुनिया में किसी की चिंता नहीं रहती है .. ऐसा ही एक शख्स थे प्रशांत बोस जो चालीस साल पहले कोलकाता से मुंबई आया था संगीत में एम.ए. की डिग्री हासिल कर , लम्बे संघर्ष के बाद भी उन्हें वो सफलता नहीं मिली जिसके वो हक़दार थे . आखिरकार उन्होंने संघर्ष करना छोड़ दिया और इधर उधर भटकने में ही अपनी दिनचर्या शुरू कर दी. हिंदी फिल्म जगत और भोजपुरी फिल्म जगत का ऐसा कोई भी संगीतकार या कलाकार ऐसा नहीं है जो प्रशांत बोस को जानते नहीं थे. पिछले सोमवार को ७६ साल का वो गुमनाम संगीतकार का ऑडियो लैब के पास निधन हो गया . पिछले कई सालो से वो अक्सर यही रहा करते थे .. उनकी आय के श्रोत थे वो गायक जो रिकोर्डिंग के लिए आते थे और अपनी मर्ज़ी से उन्हें कुछ ना कुछ थमा देते थे . हमेशा साफ़ सुथरे कपड़ो और अच्छे अच्छे होटल में खाना खाने के शौक़ीन प्रशांत के मौत की खबर जब ऑडियो लैब के सतीश पुजारी को मिली तो उन्होंने ससम्मान उनका अंतिम संस्कार कराने का फैसला किया . उन्होंने कानून की नज़र में लावारिस उस मृत शरीर को अपनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है , कानूनी प्रक्रिया के बाद सात दिन बाद प्रशांत का मृत शरीर सतीश पुजारी को मिलेगा. पुजारी के अनुसार फिल्म जगत में जिस तरह लोकप्रिय लोगो को ससम्मान विदा किया जाता है वैसी ही विदाई प्रशांत को भी दी जाएगी.

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